राधे राधे! होली तो पूरे देश में खेली जाती है, पर ब्रज की होली की बात ही अलग है. यह राधा-कृष्ण की धरती है, और यहां होली एक दिन का रंग नहीं, पूरा एक मौसम है. मंदिरों में उत्सव, गांवों की परंपराएं, रसिया के गीत और हर गली में गुलाल. मज़ा भी बहुत है और भीड़ भी. थोड़ी सी तैयारी से यह यात्रा यादगार बन जाती है, वरना थकान ही हाथ लगती है.
ब्रज की होली खास क्यों है
मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव में होली कान्हा के राधा रानी और गोपियों के साथ रंग खेलने की कथाओं से जुड़ी है. उत्सव मुख्य होली से पहले ही शुरू हो जाते हैं और एक जगह से दूसरी जगह चलते रहते हैं.
बरसाना की लट्ठमार होली
सबसे प्रसिद्ध है लट्ठमार होली, जो बरसाना और नंदगांव में होली से कुछ दिन पहले होती है. कथा है कि कान्हा अपने सखाओं के साथ नंदगांव से बरसाना राधा रानी और सखियों को छेड़ने आते हैं, और बरसाना की गोपियां उन्हें हंसी-हंसी में लाठियों से भगाती हैं. यह देखने लायक नज़ारा है, और भीड़ भी बहुत होती है. दूरी और जाने का तरीका हमारी बरसाना नंदगांव यात्रा पोस्ट में है.
वृंदावन के मंदिरों की होली
वृंदावन के मंदिरों में अपने ढंग से होली मनती है. रंग, फूल, भजन और संगीत. बांके बिहारी के आसपास की पुरानी गलियों में माहौल बहुत ज़ोरदार होता है. गलियां ठसाठस भरी रहती हैं और हर तरफ़ से रंग उड़ता है.
मथुरा की होली
मथुरा में पुराना शहर, यमुना के घाट और मंदिर, सब जीवंत हो उठते हैं. शहर के अलग-अलग हिस्सों में शोभा यात्राएं और आयोजन होते हैं.
होली कब है
होली की तारीख हिंदू पंचांग से तय होती है और हर साल बदलती है. लट्ठमार होली समेत ब्रज के बाकी उत्सवों की तारीखें भी उसी हिसाब से आगे-पीछे होती हैं. train और कमरा बुक करने से पहले अपने साल की तारीखें पता कर लें, और पास आने पर स्थानीय रूप से फिर पक्का कर लें, क्योंकि कार्यक्रम बदल भी सकते हैं.
जल्दी बुकिंग करें
होली और जन्माष्टमी, ये दो समय मथुरा वृंदावन में साल की सबसे ज़्यादा भीड़ वाले होते हैं. दोनों शहरों में कमरे जल्दी भर जाते हैं, और जितना त्योहार पास आता है, अच्छे विकल्प उतने कम बचते हैं. त्योहारों पर दाम भी बढ़ते हैं. आना पक्का है, तो तारीख तय होते ही बुक कर लें.
होली पर कहां रुकें
होली के आयोजन पूरे ब्रज में फैले हैं. पश्चिम में बरसाना और नंदगांव, उत्तर में वृंदावन, और खुद मथुरा में भी. मथुरा के बीच में रुकने से बिना होटल बदले सब जगह जाना आसान रहता है.
| जन्मभूमि से | दूरी (लगभग) | आम दिन में समय (लगभग) |
|---|---|---|
| द्वारकाधीश मंदिर और विश्राम घाट | 2 km | 10 से 15 मिनट |
| मथुरा जंक्शन | 3 km | 10 से 15 मिनट |
| वृंदावन (बांके बिहारी) | 10 km | 30 से 40 मिनट |
| बरसाना | 42 km | 1 घंटा 15 मिनट |
| नंदगांव | 54 km | 1 घंटा 30 मिनट |
ये आम दिनों का समय है. होली पर सड़कें बहुत धीमी होती हैं, कुछ रास्ते बंद भी हो सकते हैं और parking जल्दी भर जाती है. जितना सोचते हैं, उससे काफ़ी पहले निकलें.
होली के लिए कमरे में क्या देखें
- Parking, अगर गाड़ी से आ रहे हैं. त्योहार पर भीड़ वाले इलाकों में सड़क पर जगह मिलना मुश्किल है.
- 24 घंटे check-in, क्योंकि त्योहार के मौसम में trains और सड़कें दोनों देर करती हैं.
- Private bathroom, क्योंकि रंग खेलने के बाद ठीक से नहाना ज़रूरी है.
- Power backup और पीने का पानी.
क्या पहनें, क्या साथ रखें
- पुराने कपड़े जो फेंक सकें. रंग अक्सर नहीं छूटता. सफ़ेद कपड़े परंपरा भी हैं और फ़ोटो में अच्छे भी लगते हैं, पर मान लीजिए कि वे खराब होंगे.
- बाल और त्वचा ढकें. बहुत से लोग खेलने से पहले बालों और त्वचा पर तेल लगा लेते हैं, जिससे रंग आसानी से छूटता है.
- धूप का चश्मा, आंखों को गुलाल से बचाने के लिए.
- आरामदायक जूते जो गंदे हो जाएं तो फ़र्क न पड़े.
- फ़ोन zip-lock bag में, या बेहतर है कमरे पर ही छोड़ दें. रंग और पानी से फ़ोन खराब हो सकता है, और भीड़ भरी गली में फ़ोन ऊपर उठाना ठीक नहीं.
- बहुत कम पैसे और ID की एक copy. कीमती सामान कमरे में रखें.
भीड़ में सुरक्षित कैसे रहें
- अपने group के साथ रहें और बिछड़ने पर मिलने की एक जगह तय कर लें.
- बच्चों का हाथ पकड़कर रखें, या छोटे बच्चों को सबसे ज़्यादा भीड़ वाली जगहों से दूर रखें.
- बुज़ुर्ग और जिन्हें भीड़ में घबराहट होती है, वे किसी शांत जगह से होली का आनंद लें, या त्योहार के आसपास के कम भीड़ वाले दिनों में दर्शन करें.
- महिलाएं group में निकलें तो बेहतर है, और सबसे भीड़ वाली जगहों से बचें. कोई स्थिति ठीक न लगे तो वहां से निकल जाएं.
- पानी पीते रहें और बीच में आराम करें. दिन लंबा और थकाने वाला होता है.
- अनजान लोगों से खाने-पीने की चीज़ें लेने में सावधानी रखें.
यात्रा का पूरा आनंद कैसे लें
ब्रज की होली एक दौड़ में नहीं, कुछ दिनों में धीरे-धीरे देखने की चीज़ है. एक-दो मुख्य आयोजन चुनें, बीच में आराम करें, और आम दर्शन के लिए भी समय रखें. पहली बार आ रहे हैं, तो 2 दिन का मथुरा वृंदावन यात्रा प्लान मुख्य मंदिरों का क्रम बताएगा, और मथुरा में क्यों रुकें पेज पर सारी जगहें नक्शे पर हैं.
कहां रुकें
होली के लिए मथुरा के बीच में parking और देर रात check-in वाला कमरा बहुत सी परेशानी बचा देता है. हमारा Shri Govind Braj Dham जन्मभूमि के गेट 3 के पास है, मंदिर से 5 मिनट पैदल. AC कमरे, private bathroom, free parking और 24 घंटे check-in. कमरे ₹799 प्रति रात से शुरू होते हैं (taxes अलग), पर त्योहारों पर दाम बदलते हैं, इसलिए अपनी होली की तारीखें जितना जल्दी हो सके WhatsApp पर भेजें.
होली है! राधे राधे!