मंदिर के पास रुकने का असली फ़ायदा
जन्मभूमि के आसपास, खासकर weekend और जन्माष्टमी, होली जैसे त्योहारों पर, काफ़ी भीड़ होती है. पास में रुकने से सुबह जल्दी दर्शन के लिए auto का इंतज़ार नहीं करना पड़ता.
दोपहर की धूप में कमरे पर लौटकर AC में आराम कर सकते हैं और शाम को फिर दर्शन के लिए जा सकते हैं. बुज़ुर्गों के साथ यात्रा में यह बहुत काम आता है.
- सुबह के दर्शन के लिए पैदल पहुंचें
- दोपहर में कमरे पर आराम
- मंदिर के पास parking ढूंढने की टेंशन नहीं, गेस्ट हाउस पर free parking
दर्शन से पहले ध्यान रखें
जन्मभूमि परिसर के अंदर आम तौर पर मोबाइल फ़ोन, बैग और electronic सामान ले जाने की इजाज़त नहीं होती. इन्हें प्रवेश के पास locker या cloak room में जमा करना होता है. नियम बदल सकते हैं, इसलिए गेट पर मौजूदा नियम पूछ लें.
पास में रुकने का एक फ़ायदा यह भी है कि ज़्यादा सामान कमरे पर छोड़कर हल्के हाथ दर्शन करने जा सकते हैं. दर्शन का समय मौसम के अनुसार बदलता है, स्थानीय रूप से पता करें.
जन्मभूमि से आसपास की जगहें
जन्मभूमि के बाद ज़्यादातर लोग द्वारकाधीश मंदिर और विश्राम घाट जाते हैं. दोनों करीब 2 km दूर हैं, auto या e-rickshaw से 10 से 15 मिनट. विश्राम घाट की शाम की यमुना आरती बहुत प्रसिद्ध है.
मथुरा से दूरी
| जगह | दूरी · समय |
|---|---|
| द्वारकाधीश और विश्राम घाट | 2 km10–15 मिनट |
| मथुरा जंक्शन | 3 km10–15 मिनट |
| वृंदावन | 9 km25–40 मिनट |
| गोकुल और रमण रेती | 13 kmलगभग 30 मिनट |
| महावन | 16 kmलगभग 35 मिनट |
| गोवर्धन | 22 kmलगभग 45 मिनट |
| राधा कुंड | 27 kmलगभग 50 मिनट |
| बलदेव (दाऊजी) | 28 kmलगभग 50 मिनट |
| बरसाना | 42 kmलगभग 1 घंटा 15 मिनट |
| नंदगांव | 54 kmलगभग 1 घंटा 30 मिनट |
| आगरा (ताज महल) | 64 kmलगभग 1 घंटा 30 मिनट |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गेस्ट हाउस जन्मभूमि के किस गेट के पास है?
गेस्ट हाउस गेट 3 के पास, यादव चौराहा, शंकर रोड पर है. मंदिर तक पैदल करीब 5 मिनट लगते हैं.
क्या जन्मभूमि के अंदर मोबाइल ले जा सकते हैं?
आम तौर पर मोबाइल, बैग और electronic सामान अंदर नहीं ले जाने दिए जाते, प्रवेश के पास locker की सुविधा होती है. मौजूदा नियम गेट पर पूछ लें.
जन्मभूमि के दर्शन का समय क्या है?
दर्शन का समय मौसम के अनुसार बदलता है, इसलिए स्थानीय रूप से या गेट पर पता कर लें. भीड़ से बचना हो तो सुबह जल्दी जाना अच्छा रहता है.
जन्माष्टमी पर कमरा कब बुक करें?
जन्माष्टमी और होली मथुरा में सबसे व्यस्त समय होता है और कमरे जल्दी भर जाते हैं. जितना जल्दी हो सके WhatsApp पर तारीखें भेजें. त्योहारों पर दाम भी बदलते हैं.


